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दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ की बैठक में न्यायाधीश वीणा रानी को निलंबित किया गया। इस कदम से न्यायिक आचरण और संस्थागत निरीक्षण तंत्र पर सवाल उठे हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 'motherfucker' जैसी गालियां कानूनी दृष्टि से दंडनीय अशोभनीयता नहीं मानी जा सकतीं। इससे IPC की धारा 292 का दायरा संकुचित हुआ है।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गाली-गलौज जैसी भाषा दंडनीय अश्लीलता नहीं मानी जा सकती। इससे IPC की धारा 292 का दायरा सीमित हो गया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने न्यायाधीश वीणा रानी को निलंबित करने का निर्णय लिया है। यह कदम न्यायिक आचरण और संस्थागत निरीक्षण तंत्र के बारे में सवाल उठाता है।